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To 10 Collection of Best two Lines or whatsapp status.
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1- तुमने क्या सोचा कि तुम्हारे सिवा कोई नही मुझे चाहने वाला.. छोङ कर तो देख, मौत तैयार खङी है मुझे अपने सीने से लगाने के लिए.. 2- " दो शब्दो मे सिमटी है मेरी मोहब्बत की दास्तान.. उसे टूट कर चाहा और चाह कर टूट गये.." 3- " मंज़िलों से गुमराह भी ,कर देते हैं कुछ लोग ।। हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता !!" 4- " देखी जो नब्ज मेरी, हँस कर बोला वो हकीम, जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ, तेरे हर मर्ज की दवा वही है ...." 5- " जिंदगी में कभी भी किसी की मदद करें तो करके भूल जाएं हाँ यदि कोई तुम्हारी मदद करे तो उसे हमेशा हमेशा याद रखें ... 🌿 " 6- खाक हो गई सुसराल मे आके वो डिग्रीया 🙇 जो मेरी माँ की अलमारी की कभी शान हुआ करती थी 7- "वो इश्क़ हि क्या जिसमे हिसाब हो... मोहब्बत तो हमेशा बेहिसाब होती है.. 8- "तुम्हे याद कर लूँ तो मिल जाती है हर दर्द से निजात,, लोग यूं ही हल्ला मचाते हैं की दवाइयाँ महँगी हैं." 9- "यूँ ना खींच अपनी तरफ मुझे बेबस कर के...! ऐसा ना हो के खुद से भी बिछड़ जाऊं और तू भी ना...
Top 10 Hindi Shayari Collection 2015
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तेरे लिए तो हूँ मैं बस वक़्त का एक बुलबुला, जितना जीना था जी लिया, लो अब मैं चला | तुझे याद करता हूँ तो बढ़ जाती है तकलीफ़ें, ऐ ज़िन्दगी तू यहीं ठहर, लो अब मैं चला | _____________________________________ दस्तूर के लिखें पर टिकना, मुनासिब नहीं दोस्तों.. ये अक्सर मौके कम.. और धौके ज़्यादा देता है। _____________________________________ तुम बताओ तो मुझे किस बात की सजा देते हो। मंदिर में आरती और महफ़िल में शमां कहते हो। मेरी किस्मत में भी क्या है लोगो जरा देख लो, तुम या तो मुझे बुझा देते हो या फिर जला देते हो _____________________________________ अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे वो वक़्त भी ख़ुदा न दिखाए कभी मुझे उन की नदामतों पे हो शर्मिंदगी मुझे _____________________________________ हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे || _____________________________________ वो बेवफा हमारा इम्तेहा क्या लेगी… मिलेगी नज़रो से नज़रे तो अपनी नज़रे ज़ुका लेगी… उ...
कभी न रोने वाला बापू,फूट फूट कर रोया है | दिल को झकझोरनेेंं वाली विटिया की विदाई कविता ǃ
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कन्यादान हुआ जब पूरा,आया समय विदाई का ।। हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,सारी रस्म अदाई का । बेटी के उस कातर स्वर ने,बाबुल को झकझोर दिया ।। पूछ रही थी पापा तुमने,क्य ा सचमुच में छोड़ दिया ।। अपने आँगन की फुलवारी,मुझको सदा कहा तुमने ।। मेरे रोने को पल भर भी ,बिल्कुल नहीं सहा तुमने ।। क्या इस आँगन के कोने में, मेरा कुछ स्थान नहीं ।। अब मेरे रोने का पापा,तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।। देखो अन्तिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते हैं ।। आकर के पापा क्यों इनको,आप नहीं धमकाते हैं।। नहीं रोकते चाचा ताऊ,भैया से भी आस नहीं।। ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,कोई आता पास नहीं।। बेटी की बातों को सुन के ,पिता नहीं रह सका खड़ा।। उमड़ पड़े आँखों से आँसू,बदहवास सा दौड़ पड़ा ।। कातर बछिया सी वह बेटी,लिपट पिता से रोती थी ।। जैसे यादों के अक्षर वह,अश्रु बिंदु से धोती थी ।। माँ को लगा गोद से कोई,मानो सब कुछ छीन चला।। फूल सभी घर की फुलवारी से कोई ज्यों बीन चला।। छोटा भाई भी कोने में,बैठा बैठा सुबक रहा ।। उसको कौन करेगा चुप अब,वह कोने में दुबक रहा।। बेटी के जाने पर घर ने,जाने क्या क्या खोय...