इतनी मोहब्बत भर देंगे मेरे अल्फाज हर पन्ने में... तेरा चेहरा हर शख्स को अल्फाजो में नजर आएगा... आपको सिर्फ ठेला दिखता है,सड़क पर साहब ... हक़ीक़त में वो अपना पूरा घर खींचता है.. तुझे क्या देखा,,खुद को भूल गए हम इस कदर .. कि अपने ही घर आये,औरों से पता पूछकर... तुझे क्या देखा,,खुद को भूल गए हम इस कदर .. कि अपने ही घर आये,औरों से पता पूछकर... एक बार उन्होंने होंठों से पिला दी थी, अब भी कभी कभी उसका नसा हो जाता है... बहुत रोका मगर कहाँ तक रोकता....!!! मोहब्बत बढ़ती ही गयी, तुम्हारे नखरों की तरह....!!! मत कर जिंदगी से मोहब्बत.. ये मौत से मिल कर तुझे छोड़ जायेगी.. "मेरे दिल के करीब है वो शख़्श इतना.. कि मालूम नही होता फर्क उसमें और मुझमें.. " आज भी वो सोच के मुस्कुरा जाता हूँ… जब बचपन के किस्सों की यादों में घूम के आता हूँ… हाल तो पुंछ लू तेरा ...पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी.......!! ज़ब ज़ब सुनी हैं .....कमबख्त मोहब्बत ही हुई हैं ....